पुनर्पाठ
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हमारे बारे में

पुनर्पाठ को स्थापित करने का उद्देश्य उन साहित्यिक / आलोचनात्मक आवाजों को मंच देना है जो औपनिवेशिक सत्ता द्वारा विकृत कर दी गई भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करने का प्रयत्न कर रही है। अब तक हमे कोई एक ऐसा वेब उपक्रम नहीं दिखा था, जो इनके विचारों को एक स्थान पर प्रकाशित कर रहा हो। इसलिए पुनर्पाठ को एक ऐसा मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है।